नागपुर बुक फेस्टिवल में बोले आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, कहा - मैं बहुत आलसी हूँ, लेकिन ...
नागपुर: नागपुर में शुरू नागपुर बुक फेस्टिवल में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत शामिल हुए। इस दौरान अपने संबोधन में उन्होंने किताबें पढ़ने के बारे में बात की। उन्होंने कहा, “मैं बहुत आलसी हूँ, लेकिन मैं बहुत दिलचस्पी से पढ़ता हूँ। और इसलिए, जो लोग लिखते हैं, उनके लिए मेरे मन में स्वाभाविक रूप से बहुत सम्मान है।”
उन्होंने कहा, “लेखकों को पढ़ने से मैं जो समझता हूँ, उसके अनुसार ज्ञान के दो पहलू हैं: एक है जानकारी हासिल करना, जो ज्ञान भी है, और दूसरा है समझ हासिल करना, जिसे ज्ञान भी कहते हैं। ज्ञान का मतलब या तो जानकारी हासिल करना हो सकता है या समझ हासिल करना; दोनों ही ट्रांसमिशन के तरीके हैं।”
भागवत ने भाषा के बारे बात करते हुए कहा, “इंग्लिश में ऐसे शब्द नहीं हैं जो कुछ इंडियन कॉन्सेप्ट को सही तरीके से बता सकें। भारतीय भाषाओं में वे शब्द हैं। इंग्लिश के साथ भी ऐसा ही हो सकता है। दुनिया अब बहुत करीब है, लेकिन अक्सर ट्रांसलेशन के समय मतलब बदल जाता है।”
आरएसएस प्रमुख ने कहा, “कुछ लोग मुझे 'राष्ट्रवादी' कहते हैं, लेकिन मैं किसी से 'वाद' (झगड़े) में नहीं पड़ता। लेकिन वहां के लोग हमेशा से ही झगड़े में रहे हैं। 'राष्ट्र' के बारे में हमारी सोच उनके नेशन से अलग है। अब, हम खुद को नेशन कहते हैं और इसलिए नेशनलिज्म आता है। हम इसे 'राष्ट्रियता' या 'राष्ट्रत्व' कहते हैं जिसका मतलब नेशनलिटी या नेशनहुड हो सकता है। वहां के लोग नेशनलिज्म से डरते हैं और यह घमंड की वजह से है और इस नेशन के साथ दो युद्ध हुए और उन्हें इसका खामियाजा भुगतना पड़ा।”
admin
News Admin